Saturday, 15 May 2021

अधूरा परिचय

मैं एक ख़्वाब हूँ,
आँखों पर अधूरा सा,

मैं एक राज़ हूँ,
कानों पर अधूरा सा,

मैं एक बात हूँ,
होठों पर अधूरा सा,

मैं एक साथ हूँ,
हाथों पर अधूरा सा,

कुछ अधूरा रह गया,
कुछ अधूरा हो गया,

हो कुछ भी यहाँ,
मुझमें पूरा हो गया

मैं एक अरदास हूँ,
इबादतों में अधूरी सी

मैं एक प्यास हूँ,
कंठ में अधूरी सी,

मैं एक तस्वीर हूँ,
ज़हन में अधूरी सी,

कुछ अर्थ रह गए,
कुछ अनर्थ रह गए,

जो वक़्त में ना ढले,
वो व्यर्थ रह गए..

मैंने काल के गाल से,
जी के जंजाल से,

कुछ उधार ले लिए,
कुछ उधार दे दिए,

प्रश्न पीढ़ियों के लिए
मैंने चुनवा दिए कहीं
कुछ मेरे अपनेपन से
कुछ मेरे अधूरे मन-से...

उत्साही

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