धरती को जन्मे
कई करोड़ों वर्ष गुज़र चुके हैं
मगर आज भी ये विवाद जारी है
कि
इस धरती पे सबसे पहले कौन आया
कौन सा खुद
रब कौन सा
ईश्वर या फिर प्रभु
किस धर्म ने सबसे पहले
पृथ्वी का संचालन किया
आज मई आपको बताता हूँ
उस अनोखे
सबसे पुराने और
सबसे पुख्ता धर्म के बारे में
धर्म क्या है
तात्कालीन परिस्थितियों का समाधान
देने वाले
सवालो के जवाब निर्मित कर
चुप करने वाली क्रिया
को धर्म कहते हैं
ये सब मेरी धारणाये हैं
जो शायद
कई विश्वासो से गिरकर
कल्पनाओ से निर्मित हुयी हैं
इसके पीछे किसी की
व्यक्तिगत आलोचना या मातहत
सम्मिलित नहीं है
तो
जब मैंने
कुछ इतिहास के पन्ने
वर्तमान की धूल हटाकर देखे
तो
पता चला
कि
जो धर्म किसी की सिखा में
किसी की टोपी, किसी की पगड़ी में
किसी के जनेऊ,किसी की दाढ़ी में
तो किसी के निवस्त्र पवित्र तन में
झलकता है
वो धर्म नही
एक ज़रिया है
उस सबसे पुराने धर्म को
सब तक पहुचाने का
क्यूंकि जब
किसी काफिले में
मैं प्यासा तड़प रहा था
तो जिस व्यक्ति ने
मुझे पानी दिया
उसका वही धर्म था
मेरी बेटी को चोट लगने पर
जब उस सड़क से गुजर रहे
अनजान व्यक्ति की
आँखों की हलचल में दिखाई दिया
उसका भी वही धर्म था
मुझे नहीं पता
की क्यों
ये भीड़ आस्था के परदे में
खुद के विचारो
और संस्कृति को घोंट रही है
बस प्रतिस्पर्धा ही धर्म रह गया है
जबकि
असली और सबसे प्राचीन धर्म तो एक ही है
जो सिर्फ एक ही चीज सिखाता है
सृष्टि के हर कण की कद्र करो
हर जीव से प्रेम करो
हर निर्जीव का सम्मान करो
आँखों और दिल में
समर्पण रखो
मगर
सबसे पहले
और सबसे ज्यादा
खुद को खुश रखो
क्यूंकि इस धर्म का नियम है
आप खुश तो जग खुश
ये धर्म है प्रेम का
जिसका कोई रंग नहीं
कोई ग्रन्थ नहीं
कोई रूप नहीं
कोई आकार नहीं
बस ये तो
ह्रदय की बड़ी से बड़ी तृष्णा
की संतृप्ति इकलौता माध्यम है
यही है मूल
सत्य
और अमर
सबसे पुराना धर्म......................
-सिरफिरा कवि (अभिषेक)
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